Friday, 10 June 2011

चंद्र ग्रहण 15 को : व्यवसाय और नौकरी को नुकसान से बचाने के उपाय

15 जून को चंद्र ग्रहण होने वाला है। इस ग्रहण का असर सभी लोगों के कार्यक्षेत्र और बिजनेस पर पड़ेगा अगर इस ग्रहण पर अपने प्रोफेशन के अनुसार उपाय किए जाए तो बिजनेस और कार्यक्षेत्र में होने वाले नुकसान से बच सकते हैं।लुधियाना के ज्योतिषाचार्य  Pandit Gaurav Acharya के अनुसार  आपको अपने प्रोफेशन और बिजनेस के अनुसार क्या उपाय करने चाहिए.. 

- सरकारी कर्मचारी, राजनेता, फॉरेस्ट विभाग, दवाई व्यापारी, सुनार, ठेकेदार या हृदय रोग के डॉक्टर, इन लोगों को अपने प्रोफेशन के  अनुसार इस ग्रहण पर तांबे के बर्तन में गेहूं भर के दान दें।

- अगर आप चांदी का बिजनेस करने वाले, मनोचिकित्सक, पानी से संबंधित व्यवसायी या उद्योग वाले, ट्रेवल एजेंट, प्लास्टिक व्यापारी, फूड प्रोडक्टस वाले, स्त्री रोग विशेषज्ञ, चावल, धान के व्यापारी है तो आपको इस ग्रहण पर शिवलिंग का गाय के कच्चे दूध से अभिषेक करना चाहिए।

- प्रॅापर्टीज ब्रोकर, जेन्टस और लेडिस ब्यूटी पार्लर, वकील, कूक, ब्लड बैंक में काम करने वाले, सर्जन, धारदार वस्तुएं और हथियार बनाने वाले ग्रहण पर्व पर हनुमान मंदिर में तेल दीपक लगाएं।

- बीमा ऐजेन्ट, एकाउंटेंट, दलाल, कमीशन ऐजेन्ट, लेखक, प्रकाशक, अध्यापक, इंजीनियर, कोरियर सर्विस, बैंक कर्मचारीयों को इस ग्रहण पर गाय को हरी घास खिलाएं।

- बैंक, शिक्षा से जुड़ें लोग, जज, ज्योतिषी, धर्म शिक्षक, कंसल्टेंट्स, मैनेजमेंट का काम करने वाले लोग किसी मंदिर में पीले कपड़े में चने की दाल का दान दें।

- इलेक्ट्रॉनिक्स का काम करने वाले, फिल्म, टी.वी., नाटक और मनोरंजन के क्षेत्र से जुड़े लोग, फोटोग्राफर, विज्ञापन एजेन्सीज, ब्यूटी पार्लर, माडलिंग, फैशन व्यापार, फूलों के व्यापारी, आर्किटेक्ट, इत्र एवं सुगन्धित द्रव्य, सौंदर्य प्रसाधन के व्यवसायी या उद्योगपति आदि लोगों को मंदिर में सफेद कपड़े में चावल के साथ रूई और घी का दान देना चाहिए।

- रबर उद्योग, डेंटिस्ट, सफाई से सम्बंधित कार्य करने वाले, खेती के उपकरण बेचने वाले, पेट्रोलियम पदार्थों के व्यापारी, खनिज इंजीनियर, लेबर के ठेकेदार, धातु, खाद्य तेल आदि वस्तुओं के व्यवसायियों को हनुमान मंदिर, शनि देव या भैरव मंदिर में तेल का दीपक लगाना चाहिए।

Thursday, 9 June 2011

चंद्र ग्रहण 15 को : व्यवसाय और नौकरी को नुकसान से बचाने के उपाय


15 जून को चंद्र ग्रहण होने वाला है। इस ग्रहण का असर सभी लोगों के कार्यक्षेत्र और बिजनेस पर पड़ेगा अगर इस ग्रहण पर अपने प्रोफेशन के अनुसार उपाय किए जाए तो बिजनेस और कार्यक्षेत्र में होने वाले नुकसान से बच सकते हैं।लुधियाना के ज्योतिषाचार्य Varinder Kumar JI  के अनुसार  आपको अपने प्रोफेशन और बिजनेस के अनुसार क्या उपाय करने चाहिए.. 

- सरकारी कर्मचारी, राजनेता, फॉरेस्ट विभाग, दवाई व्यापारी, सुनार, ठेकेदार या हृदय रोग के डॉक्टर, इन लोगों को अपने प्रोफेशन के  अनुसार इस ग्रहण पर तांबे के बर्तन में गेहूं भर के दान दें।

- अगर आप चांदी का बिजनेस करने वाले, मनोचिकित्सक, पानी से संबंधित व्यवसायी या उद्योग वाले, ट्रेवल एजेंट, प्लास्टिक व्यापारी, फूड प्रोडक्टस वाले, स्त्री रोग विशेषज्ञ, चावल, धान के व्यापारी है तो आपको इस ग्रहण पर शिवलिंग का गाय के कच्चे दूध से अभिषेक करना चाहिए।

- प्रॅापर्टीज ब्रोकर, जेन्टस और लेडिस ब्यूटी पार्लर, वकील, कूक, ब्लड बैंक में काम करने वाले, सर्जन, धारदार वस्तुएं और हथियार बनाने वाले ग्रहण पर्व पर हनुमान मंदिर में तेल दीपक लगाएं।

- बीमा ऐजेन्ट, एकाउंटेंट, दलाल, कमीशन ऐजेन्ट, लेखक, प्रकाशक, अध्यापक, इंजीनियर, कोरियर सर्विस, बैंक कर्मचारीयों को इस ग्रहण पर गाय को हरी घास खिलाएं।

- बैंक, शिक्षा से जुड़ें लोग, जज, ज्योतिषी, धर्म शिक्षक, कंसल्टेंट्स, मैनेजमेंट का काम करने वाले लोग किसी मंदिर में पीले कपड़े में चने की दाल का दान दें।

- इलेक्ट्रॉनिक्स का काम करने वाले, फिल्म, टी.वी., नाटक और मनोरंजन के क्षेत्र से जुड़े लोग, फोटोग्राफर, विज्ञापन एजेन्सीज, ब्यूटी पार्लर, माडलिंग, फैशन व्यापार, फूलों के व्यापारी, आर्किटेक्ट, इत्र एवं सुगन्धित द्रव्य, सौंदर्य प्रसाधन के व्यवसायी या उद्योगपति आदि लोगों को मंदिर में सफेद कपड़े में चावल के साथ रूई और घी का दान देना चाहिए।

- रबर उद्योग, डेंटिस्ट, सफाई से सम्बंधित कार्य करने वाले, खेती के उपकरण बेचने वाले, पेट्रोलियम पदार्थों के व्यापारी, खनिज इंजीनियर, लेबर के ठेकेदार, धातु, खाद्य तेल आदि वस्तुओं के व्यवसायियों को हनुमान मंदिर, शनि देव या भैरव मंदिर में तेल का दीपक लगाना चाहिए।


टाइम को टाइम पर करें कंट्रोल---


आज के समय में विद्यार्थीयों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, समय का प्रबंधन क्योंकि विद्यार्थी जीवन के दौरान व्यतीत किया हुआ प्रत्येक सेकण्ड आने वाले समय में कई गुना परिणाम देने वाला होता है। जो विद्यार्थी क्षण-क्षण का उपयोग करते है, वे अपने जीवन में हमेशा सर्वश्रेष्ठ मुकामों को हासिल करते है। समय निरंतर आगे बढता रहता है। 

समय की गति न कभी कम होती है न कभी ज्यादा होती है न उसे हम रोक के रख सकते है वह तो एक जैसा हमेशा आगे बढता रहता है। यदि हम भी समय की गति के साथ आगे बढते रहते है। तो हम अपने आप को पहले से अधिक बेहतर पाते है और जीवन में उन्नति कर पाते है। समय प्रबंधन का सबसे सरल सिद्धांत यह है कि हम अपने आप को समय के साथ मैनेज करते चले और अपने लक्ष्य की तरफ बढते जाये । सबसे पहले तो हमारा विज+न स्पष्ट होना चाहिए कि हम क्या चाहते है? 

हमारा अगला कदम क्या होगा यह हमें पहले से ही मालुम होना चाहिए । यदि हम अपने कॅरियर के प्रति गंभीर है, जीवन में कुछ करना चाहते है, हमारे दोस्त अच्छे है, हमारी संगति अच्छी है, हमारे अंदर अच्छे विचार उत्पन्न होते है, हमारे आस-पास हमने सकारात्मक माहौल तैयार कर रखा है, तो निश्चित रूप से हम समय के महत्व को समझेंगे और अपने जीवन को बेहतर बनाने की तरफ कदम बढाऐंगे। जब हमारा विजन स्पष्ट है, हम हमारे कदमों को आगे बढा रहें है, तो हमें प्राथमिकता तय करनी होगी। 

किसी समय में हमारे पास चार तरह के कार्य है, तो हमारे लक्ष्य के अनुसार हमें उस कार्य को पहले करना होगा जो हमें हमारे लक्ष्य तक पहुचने में सीधे मदद करता है। ऐसे सभी कार्य, ऐसे सभी लोग, ऐसे सारे विचार, ऐसी सारी स्थितियॉ, जो लक्ष्य प्राप्ति में सीधे मदद नही करती है, उन्हें विनम्रता पूर्वक टाल दें या फिर नजर अंदाज कर दें। 

जानबुझ करके इन दूसरी चीजों में समय देकर हम अपने समय को नष्ट कर रहें होते है। समय हमारे पास सीमित ही है, असीमित नही है। अतः प्राथमिकता के आधार पर ही कार्य करें। अपने स्वास्थ्य पर जरूर ध्यान दे ऐसे सभी खाद्यपदार्थ, पेय पदार्थ, जो मन को चंचल बनाते हो शरीर में आलस्य का निर्माण करते हो सुपाच्य न हो हमारे शरीर को शक्ति देने के बताये शक्ति को चुसते हो खाने योग्य नही है। 


ND
नियमित व्यायाम, घुमने जाना योग, प्राणायाम करना प्राकृतिक चिकित्सा करवाना निहायति जरूरी है। यदि हम शारिरिक रूप से स्वस्थ है तो हम समय प्रबंधन बहुत ही आसानी से कर लेते है। मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी जरूरी है। 

ज्यादा कल्पनाओं के जाल बुनने से, भूतकाल का पश्चाताप करने से, भविष्य के बारे में नकारात्मक सोचने से, अधिक मनोरंजन करने से, ज्यादा बोलने से, मानसिक ऊर्जा नष्ट हो जाती है अतः इन सबसे बचे ध्यान एवं त्राटक के उपयोग से, वाद्य यंत्रों के संगीत से शास्त्रीय संगीत की धुनों से, ध्यान लगाने से अपनी चेतना को श्वास, प्रश्वास पर केन्द्रित करने से, अच्छा साहित्य पढने से, हमारा मन एकाग्र हो जाता है। हम अन्दर से अपने आप को स्थिर और सहज पाते है। 

जो कार्य हम पहले साठ मिनिट में करते थे वह कार्य अब हम पचास मिनिट में करने लग जाते है। इस प्रकार हमें कार्य करने के लिए अधिक घण्टे मिल जाते है हमारे पास एक हफ्ते में 168 घंटे होते है। हमारे पास एक दिन में 24 घंटे होते है जिसमें से 10 घंटों पर हमारा कोई नियंत्रण नही होता है किन्तु 14 घंटें हमारे पास प्रतिदिन होते है जिसमें हम कार्य करने योग्य होते है, इन 14 घंटों का सर्वश्रेष्ठ उपयोग हमें हमारे जीवन में बहुत आगे ले जायेगा स्कुल की पढाई स्कुल में करें स्कुल का होमवर्क स्कुल से आते से ही करले कोचिंग की पढाई कोचिंग में ही करें और कोचिंग का होमवर्क कोचिंग से आते ही करें। 

परीक्षा में सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आपने स्वअध्ययन कितना किया है। कोचिंग और स्कुल के होमवर्क के अलावा जो आप स्वंय रिवाईज करते है याद करते है अपना खुद का टेस्ट लेते है कठीन चीजों को अतिरिक्त समय देते है इससे आप दूसरों से बेहतर अंक ला सकते है। 1 घंटें से लेकर 2 घंटों तक का स्वअध्ययन निहायति जरूरी है। 

स्कूल के अवकाश के दिन का उपयोग स्कुल के नियमित समय में ही पूर्ण करें जो आगे पढाया जाना है उसका पहले से ही तैयारी करें। कोचिंग के अवकाश का उपयोग कोचिंग के अतिरिक्त कार्यो को एवं जो पढाया जाने वाला है उसकों पूरा करने में अपना समय दे। 

यदि पहले का कुछ छुटा हुआ है तो उसे किसी मित्र या शिक्षक की सहायता से अवकाशवाले दिन करने की कोशिश करें। नियमित अध्ययन एवं प्रत्येक क्षण का स्वस्थ रहते हुए सर्वश्रेष्ठ उपयोग हमें प्रतियोगिता में सबसे आगे ले जाकर खड़ा कर देगा।

Sunday, 5 June 2011

क्या हे गोमती चक्र????

गोमती चक्र क्या है..????
गोमती चक्र कम कीमत वाला एक ऐसा पत्थर है जो गोमती नदी मे मिलता है। विभिन्न तांत्रिक कार्यो तथा असाध्य रोगों में इसका प्रयोग होता है। असाध्य रोगों को दुर करने तथा मानसिक शान्ति प्राप्त करने के लिये लगभग 10 गोमती चक्र लेकर रात को पानी में डाल देना चाहिऐ। सुबह उस पानी को पी जाना चाहिऐ । इससे पेट संबंध के विभिन्न रोग दुर होते है।
धन लाभ के लिऐ 11 गोमती चक्र अपने पुजा स्थान मे रखना चाहिऐ उनके सामने ॐ श्री नमः का जाप करना चाहिऐ। इससे आप जो भी कार्य करेंगे उसमे आपका मन लगेगा और सफलता प्राप्त होगी । किसी भी कार्य को उत्साह के साथ करने की प्रेरणा मिलेगी।
गोमती चक्रों को यदि चांदी अथवा किसी अन्य धातु की डिब्बी में सिंदुर तथा अक्षत डालकर रखें तो ये शीघ्र फलदायक होते है। होली, दीवाली, तथा नवरात्रों आदि पर गोमती चक्रों की विशेष पुजा की जाति है। अन्य विभिन्न मुहुर्तों के अवसर पर भी इनकी पुजा लाभदायक मानी जाती है। सर्वसिद्धि योग तथा रावेपुष्य योग आदि के समय पुजा करने पर ये बहुत फलदायक है।
गोमती चक्र की पूजा----
होली, दिवाली और नव रात्रों आदिपर गोमती चक्र की विशेष पूजा होती है। सर्वसिद्धि योग, अमृत योग और रविपुष्य योग आदि विभिन्न मुहूर्तों पर गोमती चक्र की पूजा बहुत फलदायक होती है। धन लाभ के लिए ११ गोमती चक्र अपने पूजा स्थान में रखें तथा उनके सामने ॐ श्रींनमः का जाप करें।
ऊपरी बाधाओं से मुक्ति दिलाए गोमती चक्र----
गोमती चक्र कम कीमत वाला एक ऐसा पत्थर है जो गोमती नदी में मिलता है। विभिन्न तांत्रिक कार्यों तथा असाध्य रोगों में इसका प्रयोग होता है। इसका तांत्रिक उपयोग बहुत ही सरल होता है। किसी भी प्रकार की समस्या के निदान के लिए यह बहुत ही कारगर उपाय है।
1- यदि घर में भूत-प्रेतों का उपद्रव हो तो दो गोमती चक्र लेकर घर के मुखिया के ऊपर घुमाकर आग में डाल दें तो घर से भूत-प्रेत का उपद्रव समाप्त हो जाता है।
2- यदि घर में बीमारी हो या किसी का रोग शांत नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर उसे चांदी में पिरोकर रोगी के पलंग के पाये पर बांध दें। उसी दिन से रोगी को आराम मिलने लगता है।
3- प्रमोशन नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें और सच्चे ह्रदय से प्रार्थना करें। निश्चय ही प्रमोशन के रास्ते खुल जाएंगे।
4- व्यापार वृद्धि के लिए दो गोमती चक्र लेकर उसे बांधकर ऊपर चौखट पर लटका दें और ग्राहक उसके नीचे से निकले तो निश्चय ही व्यापार में वृद्धि होती है।
5- यदि इस गोमती चक्र को लाल सिंदूर के डिब्बी में घर में रखें तो घर में सुख-शांति बनी रहती है।
प्रमोशन के लिए टोटका----
प्रमोशन के लिए प्रत्येक सोमवार को शिवजी पर एक गोमती चक्र चढाये।
व्यापार बढ़ाने के लिए कुछ टोटके----
गोमती चक्र लक्ष्मी का स्वरुप है। ११ गोमती चक्र एक लाल पोटली में बाँध कर दूकान में रखने से व्यापार अच्छा चलेगा।
गोमती चक्र----
यदि बीमार व्यक्ति ठीक नही हो पा रहा हो अथवा दवाइया नही लग रही हो तो उसके सिरहाने पाँच गोमती चक्र "ॐ जूं सः" मंत्र से अभिमंत्रित करके रखे , रोगी को शीघ्र ही स्वाथ्य लाभ होगा।

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Thursday, 2 June 2011

जानिए आपकी राशि के लिए कैसा रहेगा हनुमानजी का दिन?

ज्योतिष के अनुसार जानिए आपकी राशि के लिए कैसा रहेगा मंगलवार और इस दिन क्या करें, क्या न करें...

मेष- हर कार्य में रुकावट से आपको परेशानी महसूस होगी। कारोबार में कोई बडा काम मिलेगा। नौकरी में पदौन्नति के अवसर प्राप्त होगा। शिवजी को ध्वज समर्पित करें। शुभ रंग स्लेटी, अंक 7.

वृषभ- संगठन में आपका वर्चस्व बढ़ेगा। कार्य में दूसरे के ऊपर निर्भर नहीं रहें। अधिकारी आपकी बात को महत्व देंगे। परिवार सहयोग करेगा। नीम को जल चढ़ाएं। शुभ रंग 5.

मिथुन- मिथ्या आरोप का सामना करना पड़ सकता है। किसी की मदद करके आपको अच्छा महसूस होगा। आपके निर्णयों में सटीकता का अभाव रहेगा। हनुमानजी को तेल का दीपक लगाएं। शुभ रंग हरा, अंक 12.

कर्क- अनिष्ट से रक्षा होगी। आपका भाग्य साथ देगा। कार्य की अधिकता रहेगी। विपरित लिंग की तरफ आकर्षण हो सकता है। मां दुर्गा का दर्शन करें। शुभ रंग गुलाबी, अंक 8.

सिंह- जीवन साथी से संबंधों में सुधार होगा। कार्यस्थल पर विवाद हो सकता है। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। निर्णयों का स्वागत होगा। बजरंग बाण का पाठ करें। शुभ रंग पीला, अंक 4.

कन्या- परिवार में आप महत्वपूर्ण रहेंगे। मुकद्दमों में बाजी आपके हाथ रहेगी। किसी की मदद करने में आप  विवाद में फंस सकते है। कार्तीकेय स्वामी को शाम को घी का दीपक लगाएं। शुभ रंग आसमानी, अंक 11.

तुला- संतान आपकी बातों को नजरअंदाज करेगी इससे दु:ख उत्पन्न होगा। विवादों से परिवार की एकता में बिखराव होगा। शत्रु हावी होने का प्रयास करेगा। हनुमानजी को अष्टगंध का तिलक लगाएं। शुभ रंग जामुनी, अंक 9.

वृश्चिक- हमेशा आप विजयी हो यह संभव नहीं। धैर्य रखकर अच्छे समय का इंतजार करें। कार्य का तरीका बदलना होगा। सहयोगी बने। कुत्ते को कच्चा दूध पीने को दें। शुभ रंग कत्थई, अंक 3.

धनु- बिना एहसान लिए कार्य करने की प्रवृत्ति बनेगी। अपने दम पर ही आप सफलता की ओर अग्रसर होंगे। परिवार का साथ मिलेगा। गणेशजी का हरे रंग वाले चित्र का दर्शन करें। शुभ रंग नीला, अंक 10.

मकर- दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। संतान से शुभ समाचार मिलेगा। अपने अनुभवों से आपको लाभ प्राप्त होगा। लंबी छुट्टियों पर जाने की योजना बनेगी। इष्ट देव के नाम की एक माला का जाप करें। शुभ रंग लाल, अंक 1.

कुंभ- रिश्तेदारों एवं मेहमानों के आने से व्यस्तता रहेगी। कार्यों में आ रही विलंब से खिन्नता उत्पन्न होगी। संपर्कों का लाभ मिलेगा। चीनी की गोली बनाकर या टॉफी का वितरण बच्चों में करें। शुभ रंग काला, अंक 2.

मीन- अचानक धन की प्राप्ति का योग है। भाग्य का साथ मिलेगा। अधिकारियों से लाभ की प्राप्ति का योग है। अपने गुप्त रहस्यों को किसी पर प्रकट नहीं करे। शिवलिंग पर जल अर्पण करें। शुभ रंग महरुन, अंक 6.

Wednesday, 1 June 2011

रत्‍न : कब, कौनसा और कैसे पहनें

आमतौर पर ज्‍योतिष और ज्‍योतिष से जुड़ी किसी भी विधा को विज्ञान का दर्जा दे दिया जाता है। लेकिन रत्‍न विज्ञान को इस तर्ज पर विज्ञान का दर्जा नहीं मिला है। जैमोलॉजी वास्‍तव में एक विज्ञान है और इस पर अच्‍छा खासा काम हो रहा है। यह बात अलग है कि कीमती पत्‍थरों ने अपना यह स्‍थान खुद बनाया है। ठीक सोने, चांदी और प्‍लेटिनम की तरह। इसमें ज्‍योतिष का कोई रोल नहीं है। 
पर यकीन मानिए भाग्‍य के साथ रत्‍नों का जुड़ाव मोहनजोदड़ो सभ्‍यता के दौरान भी रहा है। उस जमाने में भी भारी संख्‍या में गोमेद रत्‍न प्राप्‍त हुए हैं। यह सामान्‍य अवस्‍था में पाया जाने वाला रत्‍न नहीं है, इसके बावजूद इसकी उत्‍तरी पश्चिमी भारत में उपस्थिति पुरातत्‍ववेत्‍ताओं के लिए भी आश्‍चर्य का विषय रही। पता नहीं उस दौर में इतने अधिक लोगों ने गोमेद धारण करने में रुचि क्‍यों दिखाई, या गोमेद का रत्‍न के रूप में धारण करने के अतिरिक्‍त भी कोई उपयोग होता था, यह स्‍पष्‍ट नहीं है, लेकिन वर्तमान में राहू की दशा भोग रहे जातक को राहत दिलाने के लिए गोमेद पहनाया जाता है। 
इंटरनेट और किताबों में रत्‍नों के बारे में विशद जानकारी देने वालों की कमी नहीं है। इसके इतर मेरी पोस्‍ट इसकी वास्‍तविक आवश्‍यकता के बारे में है। मैं एक ज्‍योतिष विद्यार्थी होने के नाते रत्‍नों को पहनने का महत्‍व बताने नहीं बल्कि इनकी वास्‍तविक आवश्‍यकता बताने का प्रयास करूंगा।
दो विधाओं में उलझा रत्‍न विज्ञान
वर्तमान दौर में हस्‍तरेखा और परम्‍परागत ज्‍योतिष एक-दूसरे में इस तरह घुलमिल गए हैं कि कई बार एक विषय दूसरे में घुसपैठ करता नजर आता है। रत्‍नों के बारे में तो यह बात और भी अधिक शिद्दत से महसूस होती है। हस्‍तरेखा पद्धति ने हाथ की सभी अंगुलियों के हथेली से जुड़े भागों पर ग्रहों का स्‍वामित्‍व दर्शाया है। ऐसे में कुण्‍डली देखकर रत्‍न पहनने की सलाह देने वाले लोग भी हस्‍तरेखा की इन बातों को फॉलो करते दिखाई देते हैं। जैसे बुध के लिए बताया गया पन्‍ना हाथ की सबसे छोटी अंगुली में पहनने, गुरु के लिए पुखराज तर्जनी में पहनने और शनि मुद्रिका सबसे बड़ी अंगुली में पहनने की सलाहें दी जाती हैं। बाकी ग्रहों के लिए अनामिका तो है ही, क्‍योंकि यह सबसे शुद्ध है। मुझे इस शुद्धि का स्‍पष्‍ट आधार नहीं पता लेकिन शुक्र का हीरा, मंगल का मूंगा, चंद्रमा का मोती जैसे रत्‍न इसी अंगुली में पहनने की सलाह दी जाती है। 
शरीर से टच तो हुआ ही नहीं
शुरूआती दौर में जब मुझे ज्‍योतिष की टांग-पूछ भी पता नहीं थी, तब मैं एक पंडितजी के पास जाया करता था। वहां एक जातक को लेकर गया, उन्‍होंने मोती पहनने की सलाह दी। मैंने जातक के साथ गया और मोती की अंगूठी बनवाकर पहना दी। कई सप्‍ताह गुजर गए। कोई फर्क महसूस नहीं हुआ तो जातक महोदय मेरे पास आए और मुझे लेकर फिर से पंडितजी के पास पहुंचे। पंडितजी ने कहा दिखाओ कहां है अंगूठी। दिखाई तो वे खिलखिलाकर हंस दिए। बोले यह तो शरीर के टच ही नहीं हो रही है तो इसका असर कैसे पड़ेगा। मैंने पूछा तो टच कैसे होगी। तो उन्‍होंने बताया कि बैठकी मोती खरीदो और फलां दुकान से बनवा लो। हम दौड़े-दौड़े गए और बैठकी मोती लेकर बताई गई दुकान पर पहुंच गए। हमने बताया कि टच होने वाली अंगूठी बनानी है। दुकानदार समझ गया कि पंडित जी ने भेजा है। उसने कहा कल ले जाना। और अगले दिन अंगूठी बना दी। वह इस तरह थी कि नीचे का हिस्‍सा खाली था। इससे मोती अंगुली को छूता था। कुछ ही दिनों में मोती पहनाने का असर भी हो गया। मेरे मन में भक्ति भाव जाग गया, और एक बात हमेशा के लिए सीख गया कि जो भी रत्‍न पहनाओ उसे शरीर के टच कराना जरूरी है। 
टच से क्‍या होता है किरणें महत्‍वपूर्ण हैं 
अंग्रेजी में इसे पैराडाइम शिफ्ट कहते हैं और हिन्‍दी में मैं कहूंगा दृष्टिकोणीय झटका। एक दूसरे हस्‍तरेखाविज्ञ कई साल बाद मुझसे मिले। मैं किसी को उपचार बता रहा था और साथ में शरीर से टच होने वाली नसीहत भी पेल रहा था, कि हस्‍तरेखाविज्ञ ने टोका कि टच होने से क्‍या होता है, यह कोई आयुर्वेदिक दवा थोड़े ही है। रत्‍नों के जरिए तो किरणों से उपचार होता है। मैंने स्‍पष्‍ट कह दिया समझा नहीं तो उन्‍होंने समझाया कि हम जो रत्‍न पहनते हैं वे ब्रह्माण्‍ड की निश्‍चित किरणों को खींचकर हमारे शरीर की कमी की पूर्ति करते हैं। इससे हमारे कष्‍ट दूर हो जाते हैं। विज्ञान का ठोठा स्‍टूडेंट होने के बावजूद मुझे पता था कि हम जो रंग देखते हैं वास्‍तव में वह उस पदार्थ द्वारा रिफलेक्‍ट किया गया रंग होता है। यानि स्‍पेक्‍ट्रम के एक रंग को छोड़कर बाकी सभी रंग वह पदार्थ निगल लेता है, जो रंग बचता है वही हमें दिखाई देता है। ऐसा ही कुछ रत्‍नों के साथ भी होता होगा। यह सोचकर मुझे उनकी बात में दम लगा।

अब मैं तो कंफ्यूजन में हूं कि वास्‍तव में टच करने से असर होगा या किरणों से असर होगा। वास्‍तव में रत्‍नों की जरूरत है भी कि नहीं, रत्‍नों का विकल्‍प क्‍या हो सकता है, रत्‍न किसे पहनाना आवश्‍यक है, इन सब बातों को लेकर कालान्‍तर में मैंने कुछ तय नियम बना लिए... अब ये कितने सही है कितने गलत यह तो नहीं बता सकता, लेकिन इससे जातक को धोखे में रखने की स्थिति से बच जाता हूं। 
क्‍या है ये नियम अगली पोस्‍ट में बताउंगा....