इतना तो सबको मालूम है कि सप्ताह के दिनों के नाम ग्रहों की संज्ञाओं के आधार पर रखे गए हैं अर्थात जो नाम ग्रहों के हैं, वही नाम इन दिनों के भी हैं. जैसे सूर्य के दिन का नाम रविवार, आदित्यवार, अर्कवार, भानुवार इत्यादि. शनिश्चर के दिन का नाम शनिवार, सौरिवार आदि. चाहे आप संस्कृ्त मे य़ा अन्य किसी भी भाषा में देख लें, साप्ताहिक दिनों के नाम सात ग्रहों के नाम पर भी आपको रखे मिलेंगें. संस्कृ्त में ग्रह के नाम के आगे वार या वासर या कोई ओर प्रयायवाची शब्द रख दिया जाता है. इससे यह सूचित होता है कि अमुक दिन का अमुक ग्रह है. पश्चिमी भाषाओं में भी, इसी प्रकार ग्रहों के नामों के साथ दिन का वाचक शब्द लगा दिया जाता है. जैसे कि लेटिन में सोमवार को Lunae, मंगलवार को Martis, बुधवार के लिए Mercurii इत्यादि.
अब प्रश्न यह उत्पन होता है कि यह क्रम कैसे चला और अमुक दिन अमुक ग्रह का है----इसका अभिप्राय क्या है?. ज्योतिष के ग्रन्थों के अनुसार प्राचीन समय में ग्रहों का क्रम इस प्रकार माना जाता था---शनि, बृ्हस्पति, मंगल, सूर्य, शुक्र, बुध और चन्द्रमा. अर्थात पृ्थ्वी की अपेक्षा शनि सबसे ऊपर या दूर माना जाता था और चन्द्रमा सबसे नीचे अर्थात नजदीक. इन ग्रहों को, जैसा कि सूर्य सिद्धान्त आदि ग्रन्थों से सिद्ध है, ज्योतिषियों नें दिनों का स्वामी माना है.
सूर्योदय से सूर्यादय तक के समय की संज्ञा दिन है. हमारे पूर्वजों नें इस काल को 60 भागों में विभक्त किया और एक-एक भाग का नाम घडी(घटी या घटिका) रखा. दूसरों नें उसे 24 भागों में बाँट दिया और एक एक भाग का नाम घंटा( Hour) रखा. फिर उन्होने एक-एक घंटे के समय को एक-एक ग्रह को बाँट दिया अर्थात उन्होने मान लिया कि एक-एक घंटा क्रमश: एक-एक ग्रह के आधिपत्य में रहता है. सूर्यदेव को पूरे विश्व में सभी जगह(इस्लाम को छोडकर) ग्रहों का राजा ही माना गया है. इसलिए पहले दिन की पहली घडी या घंटे का स्वामी उन्होने सूर्य को ठहराया. अतएव पहले दिन को उन्होने सूर्य का दिन माना. इसी तरह यदि हम प्रत्येक ग्रह को एक-एक घंटे का स्वामी मानते चलें तो दिनों का वही क्रम होगा जो आजकल प्रचलित है. साठ घडी के हिसाब से रोहक्रम अर्थात नीचे से ऊपर की ओर चलना होगा. अंग्रेजी Hour या घंटे के हिसाब से चलें तो ऊपर से नीचे की ओर उतरना होगा. चाहे हम सूर्य से प्रारम्भ करें, चाहे शनि से, चाहे चन्द्रमा से क्रम वही होगा. घडियों की गणना में यदि हम सूर्य से चलें तो 61वीं घडी चन्द्रमा की होगी, 121वीं मंगल की इत्यादि. अर्थात सूर्य के दिन के अनन्तर चन्द्रमा का दिन आएगा, फिर मंगल का. इसी तरह अन्य भी समझिए. घंटों के हिसाब से 25वाँ चन्द्रमा का, 49वाँ मंगल का होगा.
तदुनसार ही दिन भी होगा.
Pandit Gaurav Acharya (astrologer)
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ludhiana ,punjab
mobile:99141-44100
98148-44100
email:panditgauravacharya@gmail.com
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सूर्योदय से सूर्यादय तक के समय की संज्ञा दिन है. हमारे पूर्वजों नें इस काल को 60 भागों में विभक्त किया और एक-एक भाग का नाम घडी(घटी या घटिका) रखा. दूसरों नें उसे 24 भागों में बाँट दिया और एक एक भाग का नाम घंटा( Hour) रखा. फिर उन्होने एक-एक घंटे के समय को एक-एक ग्रह को बाँट दिया अर्थात उन्होने मान लिया कि एक-एक घंटा क्रमश: एक-एक ग्रह के आधिपत्य में रहता है. सूर्यदेव को पूरे विश्व में सभी जगह(इस्लाम को छोडकर) ग्रहों का राजा ही माना गया है. इसलिए पहले दिन की पहली घडी या घंटे का स्वामी उन्होने सूर्य को ठहराया. अतएव पहले दिन को उन्होने सूर्य का दिन माना. इसी तरह यदि हम प्रत्येक ग्रह को एक-एक घंटे का स्वामी मानते चलें तो दिनों का वही क्रम होगा जो आजकल प्रचलित है. साठ घडी के हिसाब से रोहक्रम अर्थात नीचे से ऊपर की ओर चलना होगा. अंग्रेजी Hour या घंटे के हिसाब से चलें तो ऊपर से नीचे की ओर उतरना होगा. चाहे हम सूर्य से प्रारम्भ करें, चाहे शनि से, चाहे चन्द्रमा से क्रम वही होगा. घडियों की गणना में यदि हम सूर्य से चलें तो 61वीं घडी चन्द्रमा की होगी, 121वीं मंगल की इत्यादि. अर्थात सूर्य के दिन के अनन्तर चन्द्रमा का दिन आएगा, फिर मंगल का. इसी तरह अन्य भी समझिए. घंटों के हिसाब से 25वाँ चन्द्रमा का, 49वाँ मंगल का होगा.
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